भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में Kamaladevi chattopadhyay के नाम को किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। कमलादेवी चट्टोपाध्याय न केवल अग्रिम पंक्ति की स्वतंत्रता सेनानी थीं बल्कि उतनी ही निष्ठा से उन्होंने समाज सुधार, हस्तकला आदि कई क्षेत्रों में अपना सक्रिय और रचनात्मक योगदान दिया। Kamaladevi chattopadhyay के इन्हीं महान कार्यों का स्मरण करते हुए गूगल ने अपना पेज उनको समर्पित किया है।

कमलादेवी चट्टोपाध्याय का जन्म और शिक्षा

Kamaladevi chattopadhyay
Image:  Kamaladevi chattopadhyay

सन् 1903 को भारत के दक्षिणी राज्य कर्नाटक के मंगलूर नगर में जन्मीं Kamaladevi chattopadhyay ने आरंभिक शिक्षा कर्नाटक में ही प्राप्त की, इसके बाद उच्च शिक्षा हेतु उन्होंने क्वीन मेरी कॉलेज चेन्नई में प्रवेश लिया, यहां से स्नातक होने के बाद भी उन्होंने अपने शिक्षा का क्रम आगे के जीवन में भी जारी रखा और लंदन से समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र की पढ़ाई की।

कमलादेवी चट्टोपाध्याय का परिवार

कमलादेवी अपने माता पिता की तीन संतानों में से सबसे छोटी पुत्री थीं। पिता अनन्त्या धारेश्वर सरकारी ऑफिसर थे और माता गिरिजा एक शिक्षित गृहस्वामिनी थीं। एक शिक्षित माता का प्रभाव Kamaladevi chattopadhyay की जीवन पर बहुत गहरा था। कमलादेवी अपनी मां से बहुत प्रभावित थीं।

कमलादेवी चट्टोपाध्याय का वैवाहिक जीवन

Kamaladevi chattopadhyay जब शिक्षा ही प्राप्त कर रहीं थीं तब मात्र 14 वर्ष की आयु में सन् 1917 में माता-पिता ने इनका विवाह कृष्णा राव से करवा दिया था। किंतु कृष्णा राव की मृत्यु विवाह के 2 वर्ष बाद ही हो गई।

इसके बाद 20 वर्ष की आयु में कमला देवी का दूसरा विवाह प्रसिद्ध कवि, महान् नाटककार और अभिनेता हरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय के साथ हुआ। इस विवाह से इन्हें एक पुत्र भी हुआ। अपने पुत्र का नाम इन्होंने रामकृष्ण रखा था।

लंदन में शिक्षा प्राप्ति

दूसरे विवाह के कुछ ही वर्ष बाद Kamaladevi chattopadhyay अपने पति के साथ लंदन चलीं गईं। लंदन में रहने के दौरान इन्होंने वहां के प्रसिद्ध जिमलोम बेडफोर्ड कॉलेज से समाजशास्त्र में डिप्लोमा प्राप्त किया।

पति को दिया तलाक

वैसे तो हरेन्द्रनाथ और Kamaladevi chattopadhyay का वैवाहिक जीवन अच्छा ही चल रहा था किंतु विवाह के 32 वर्ष बाद कुछ निजी कारणों से इस दंपत्ति ने तलाक लेने का फैसला ले लिया।

भारतीय स्वतंत्रता हेतु कमलादेवी चट्टोपाध्याय द्वारा किए गए कार्य

असहयोग आंदोलन में भाग लिया: जब कमलादेवी अपने पति के साथ लंदन में निवास कर रहीं थीं तभी भारत में गांधी जी द्वारा असहयोग आंदोलन आरंभ किए जाने के समाचार उन्हें मिलने लगे थे। देश प्रेम के भाव से ओतप्रोत कमलादेवी 1923 में इस आंदोलन में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने के लिए भारत लौट आईं। साथ ही साथ सामाजिक उन्नति के लिए बने संगठन सेवादल के कार्यों में भी वे बढ़-चढ़कर भाग लेने लगीं।

कमलादेवी ने सेवादल के कार्यों को करे हुए इस संगठन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में बहुत योगदान दिया। सामाजिक कार्यों में इनकी लगन और मेहनत को देखते हुए इनको सेवा दल की महिला इकाई का प्रभारी नियुक्त कर दिया गया और इस पद पर रहते हुए इन्होंने न केवल हमारे देश की महिलाओं को संगठन से जुड़ने के लिए प्रेरणा दी बल्कि उनको प्रशिक्षित भी किया।

नमक सत्याग्रह आंदोलन का हिस्सा बनीं: नमक कानून के विरोध में जब महात्मा गांधी ने 1930 में दांडी मार्च की घोषणा की तो कमला देवी आरंभ से ही उस आंदोलन का हिस्सा रहीं और गांधी जी के साथ मिलकर उन्होंने इस आंदोलन को सफलतापूर्वक पूरा किया साथ ही खुद भी नमक बनाकर ब्रिटिश सरकार का विरोध किया।

कमलादेवी से जुड़े कुछ अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

विधानसभा का कार्य संभाला : कमलादेवी देश में हो रहे विभिन्न आंदोलनों में जब सक्रिय रूप से अपना योगदान दे रहीं थीं उसी दौरान सन् 1926 में इन्हें मद्रास प्रांत की विधानसभा का कार्यालय संभालने का अवसर मिला, इन्होंने ये कार्य पूरी योग्यता के साथ किया और भारत के इतिहास की पहली ऐसी महिला बनीं जिन्होंने किसी विधानसभा का कार्यालय संभाला हो।

अखिल भारतीय महिला सम्मेलन की अध्यक्षा बनीं : वर्ष 1926 में ही Kamaladevi chattopadhyay को एक और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी तब मिली जब इन्हें अखिल भारतीय महिला सम्मेलन की अध्यक्षा बनाया गया। इस पद पर रहते हुए कमलादेवी ने महिलाओं के हित और कल्याण के लिए अनेक कार्यक्रम शुरू किये।

लेडी इरविन कॉलेज की स्थापना में योगदान : महिला शिक्षा के लिए दिल्ली में 1932 में स्थापित लेडी इरविन कॉलेज की स्थापना में भी कमलादेवी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस कॉलेज ने भारत में महिला शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाई थी।

कला के क्षेत्र में योगदान : कमलादेवी के कला के क्षेत्र में योगदान के चलते ही हमारे देश में कला से जुड़ी कई संस्थाओं की स्थापना की गई थी। जिनमें नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ कथक एंड कोरियोग्राफी और संगीत नाटक अकादमी जैसे नाम प्रमुख हैं।

अखिल भारतीय हस्तशिल्प बोर्ड की स्थापना : कमलादेवी चट्टोपाध्याय की हस्तशिल्प में बहुत गहरी रुचि थी। उनका मानना था कि इस कला का संरक्षण और संवर्धन बहुत ही आवश्यक है इसके लिए इन्होंने अखिल भारतीय हस्तशिल्प बोर्ड की स्थापना में बहुत सक्रिय और महत्वपूर्ण योगदान दिया, कमलादेवी चट्टोपाध्याय ही अखिल भारतीय हस्तशिल्प बोर्ड की प्रथम अध्यक्षा मनोनीत की गयीं थीं।

देश की स्वतंत्रता के लिए विश्व का दौरा : परतंत्र भारत के हालातों और ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियों को दुनिया के सामने रखने के लिए कमलादेवी ने विश्व दौरा भी किया और विभिन्न राष्ट्रों के सामने अपनी और अपने देश के लोगों की बात रखी जिससे की देश की स्वतंत्रता के लिए ब्रिटिश हुकूमत पर दबाव बनाया जा सके।

फरीदाबाद शहर की स्थापना : देश की आजादी अपने साथ बंटवारे की त्रासदी भी लाई थी। तब देश के जो हिस्से पाकिस्तान में चले गए थे वहां से बड़ी संख्या में शरणार्थी भारत आये, उनके सामने रहने और खाने की विकराल समस्या थी। ऐसे समय में कमलादेवी चट्टोपाध्याय ने इन लोगों की सेवा और मदद की, और कई लोगों के साथ मिलकर फरीदाबाद शहर बनाकर करीब पचास हजार से अधिक शरणार्थियों का पुनर्वास फरीदाबाद में किया गया।

फिल्मों में अभिनय:  कमलादेवी को कला में गहरी रुचि तो थी ही, अभिनय का भी बहुत शौक था इसी के चलते इन्होंने कुछ कन्नड़ फिल्मों में अभिनय भी किया था इनमें प्रमुख है सन् 1931 में रिलीज हुई फिल्म ‘मृच्छकटिका’, सन् 1943 में रिलीज हुई फिल्म ‘तानसेन’ ओर ‘शंकर पार्वती’। इनके अलावा इन्होंने ‘ धन्ना भगत’ नामक फिल्म में भी अभिनय किया था।

कमलादेवी द्वारा लिखी गयीं पुस्तकें : कमला देवी विभिन्न विषयों की विद्वान तो थीं ही लेखन कार्य में भी उनकी रुचि थी। अपने जीवन में उन्होंने कई पुस्तकों की रचना की, इन्होंने सबसे पहले जो पुस्तक लिखी वह थी सन् 1939 में ‘द अवेकनिंग ऑफ इंडियन वीमेन’, इसके अतिरिक्त अंकल सैम एम्पायर, इन वाॅर टाॅर्न चाइना, जापान इट्स वीकनेस, ट्रेडिशंस ऑफ इंडियन फोक डांस, द ग्लोरी ऑफ इंडियन हैंडीक्राफ्ट्स आदि प्रमुख हैं। Kamaladevi chattopadhyay के जीवन पर भी कई लेखकों ने पुस्तकें लिखीं हैं।

कमलादेवी को मिले पुरस्कार और सम्मान : कमलादेवी के राष्ट्र के प्रति अविस्मरणीय योगदान के लिए भारत सरकार ने इन्हें वर्ष 1995 में पद्म विभूषण और उससे पूर्व सन् 1987 में पद्मभूषण से सम्मानित किया। इसके भी पूर्व समाज सेवा के क्षेत्र में इनके योगदान को देखते हुए सन् 1966 में इन्हें प्रतिष्ठित रेमन मैग्सेसे अवार्ड भी प्रदान किया गया था,

वहीं कला के क्षेत्र में भी कमलादेवी को कई सम्मान प्राप्त हुए हैं जिनमें शांति निकेतन का उच्चतम सम्मान देसिकोटम्मा सम्मान और सन् 1974 में प्रदान की गई संगीत नाटक अकादमी की फेलोशिप भी शामिल है। वर्ष 1977 में यूनेस्को द्वारा भी इनको हस्तशिल्प के क्षेत्र में योगदान हेतु सम्मानित किया गया था।

भारत सरकार ने सन् 2017 में कमला देवी के सम्मान में ” कमलादेवी चट्टोपाध्याय राष्ट्रीय पुरस्कार” की घोषणा की। ये पुरस्कार महिला हेंडलूम वीवर्स और हेन्दिक्राफ्ट्स क्राफ्ट्समैन को दिया जाता है।

कमलादेवी की मृत्यु: 29 अक्टूबर 1988 के दिन 85 वर्ष की आयु में भारत की इस महान् स्वतंत्रता सेनानी, साहसी महिला, समाज सेविका, कला संरक्षिका ने महाराष्ट्र के मुंबई में अपनी अंतिम सांस ली।