ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड, पी मोस्ट,, BEP, DPEP, प्रौढ़ शिक्षा परियोजनाएं

नमस्कार दोस्तों Exam Notes Find में आपका हार्दिक स्वागत है आज की इस पोस्ट में हम ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड, पी मोस्ट, BEP, DPEP, प्रौढ़ शिक्षा परियोजनाओं के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्राप्त करेंगे। अगर आप लोग CTET, UPTET या किसी भी केंद्र अथवा राज्य स्तरीय शिक्षक भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करते हैं तो यह पोस्ट आपके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी। आइए शुरू करते हैं-

ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड परियोजना (Operation Black Board  in hindi)

ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड परियोजना (Operation Black Board in hindi)
Image Source: Pixabay

ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड परियोजना का शुभारंभ राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 के अंतर्गत वर्ष 1987 में किया गया। इसका शुभारंभ सातवीं पंचवर्षीय योजना (1985-1990) के अंतर्गत माना जाता है।

विद्यालयों के अनाकर्षण वातावरण, अरुचिकर पाठ्यक्रम, अपर्याप्त भवनों, पाठ्य सामग्री एवं खेल सामग्री आदि में सुधार लाने की दृष्टि से राज्य सरकार एवं शिक्षा विभाग द्वारा अनेक प्रयास किए जा रहे हैं,

इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 की कार्य योजना में ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड चलाने की संकल्पना की गई। ऑपरेशन से तात्पर्य है किसी कार्य को युद्ध स्तर पर अभियान चलाकर पूरा करना।
वर्ष 1993 -94 में ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड का विस्तार उच्च प्राथमिक विद्यालय तक कर दिया गया
ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड परियोजना के उद्देश्य (Objectives of operation blackboard programme)

ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड परियोजना के निम्नलिखित उद्देश्य हैं
1. प्रत्येक विद्यालय में कम से कम 2 कमरे बरामदा सहित
2. कक्षा शिक्षण सामग्री की उपलब्धता
3. टू इन वन ऑडियो उपकरण
4. श्यामपट्ट तथा फर्नीचर
5. विद्यालय की घंटी, चाक तथा कूड़ा दान
6. प्रसाधन (लड़के एवं लड़कियों के लिए अलग-अलग)
7. पेयजल की व्यवस्था
8. वाद्य यंत्र ढोलक, तबला, मजीरा तथा हारमोनियम
9. लघु औजार किट
10. प्रत्येक विद्यालय में कम से कम 2 अध्यापक( एक महिला अध्यापक अवश्य हो)

वर्ष 1992 में इस योजना का व्यापक रूप से मूल्यांकन किया गया तथा ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड परियोजना में निम्नलिखित संशोधन किए गए-
1. ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड योजना को अनुसूचित जाति, जनजाति वाले क्षेत्रों में जारी रखा गया।
2. नामांकित बच्चों की संख्या के आधार पर प्रत्येक प्राथमिक विद्यालयों में 3 अध्यापकों एवं 3 कमरों की व्यवस्था की गई।
3. उच्च प्राथमिक विद्यालयों तक ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड योजना का विस्तार किया गया।
4. वर्ष 1993- 94 में इस योजना को उच्च प्राथमिक कक्षाओं तक बढ़ा दिया गया जिसमें कम से कम 3 कक्षा- कक्ष और 3 शिक्षकों की व्यवस्था की गई।

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ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड की विशेषताएं

ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड की विशेषताएं निम्नलिखित हैं
1. ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड के अंतर्गत शिक्षा को छात्र केंद्रित बनाकर, शिक्षा की गुणवत्ता पर बल दिया गया है।
2. विद्यालय एवं कक्षा कक्षों को आकर्षक बनाने का प्रयास किया गया।
3. अध्ययन अध्यापन प्रक्रिया के लिए न्यूनतम मदों का उल्लेख किया गया है।
4. प्रत्येक मद की गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से आपूर्ति किए जाने वाले प्रत्येक मद के मानक तथा उनकी विशिष्टताएं निर्धारित की गई हैं।
5. कक्षा कक्ष का सामान कुर्सी, मेज, चटाई, बक्से, ब्लैक बोर्ड रोलर बोर्ड, चाक, डस्टर तथा कूड़ादान उपलब्ध कराया गया है।

ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड का क्रियान्वयन

ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड के लिए राज्य सरकारों को धनराशि अग्रिम प्रतिपूर्ति के आधार पर केंद्र सरकार द्वारा प्रदान किए जाने की व्यवस्था की गई है। प्राथमिक विद्यालयों की विशेष आवश्यकता और लागत कम करने के लिए ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड में परिकल्पित उपकरणों की आपूर्ति और प्रयोग की व्यवस्था की गई है।

विशेष रुप से ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड के अंतर्गत विद्यालय पद्धति द्वारा आपेक्षिक सामग्री तैयार करने के लिए पालिटेक्नीक, आईटीआई, माध्यमिक तथा उच्च माध्यमिक विद्यालयों में उपलब्ध कर्मचारियों को भी काम में लिए जाने का प्रावधान किया गया है।

2. सेवारत अध्यापकों का विस्तृत अभिविन्यास कार्यक्रम (P MOST Programme)

P-most का पूरा नाम “Programme for mass orientation of school teachers” है। आइए समझते हैं P-most kya hai?

एनसीईआरटी नई दिल्ली द्वारा वर्ष 1986 से यह कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 की मूल संस्तुतियों से अवगत कराना है। पी मोस्ट के अंतर्गत उपलब्ध कराई जाने वाली प्रशिक्षण सामग्री को दो भागों में बांटा गया है-

1. प्राथमिक शिक्षकों के लिए
2. माध्यमिक शिक्षकों के लिए

ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड योजना के अंतर्गत विद्यालयों को न्यूनतम शिक्षण सामग्री उपलब्ध करा लेने के उपरांत वर्ष 1990 में विस्तृत अभिविन्यास कार्यक्रम को ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड के साथ जोड़ने का निर्णय लिया गया।

इस निर्णय के अनुसार एक नई प्रशिक्षण सामग्री की संरचना की बात कही गई जिसमें ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड के अंतर्गत उपलब्ध कराई गई सामग्री के समुचित प्रयोग की बात पर बल दिया गया।

पी मोस्ट कार्यक्रम की रूपरेखा निम्नलिखित है-
1. इसके अंतर्गत विद्यालय तथा कक्षाओं को आकर्षक बनाने पर बल दिया गया।
2. बाल केंद्रित शिक्षा के आधार पर शैक्षिक गुणवत्ता के प्रोत्साहन पर बल दिया गया।
3. विद्यालयों के लिए उचित भवन, अध्यापकों एवं प्रशिक्षण सामग्री के संबंध में स्पष्ट सुविधाओं का उल्लेख किया गया।
4. मद की गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से आपूर्ति किए जाने वाले प्रत्येक मद के मानक निर्धारित किए गए।

3. बेसिक शिक्षा परियोजना (basic education project in hindi)

बेसिक शिक्षा परियोजना की शुरुआत 1993 में हुई। आरंभ में इस परियोजना को 17 जनपदों में क्रियान्वित किया गया। यह परियोजना वर्तमान में प्रदेश के सभी जनपदों में क्रियान्वित की जा रही है।

इस परियोजना के अंतर्गत बेसिक शिक्षा के सार्वजनीकरण को मुख्य रूप से महत्व दिया गया है। इस परियोजना का प्रमुख लक्ष्य नामांकन, शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार लाना है। राज्य, जनपद तथा ग्राम स्तर की संस्थाओं का स्थायीकरण ही उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायक हो सकता है।

बेसिक शिक्षा परियोजना के तीन अंग है-

1. संस्थागत क्षमता में वृद्धि- इसके अंतर्गत राज्य, जनपद तथा स्थानीय स्तरों पर नियोजन एवं प्रबंधन में सहयोग प्रदान करने वाली इकाइयों की स्थापना करके पूरे राज्य के 6 से 14 वर्ष के शत प्रतिशत बालकों का नामांकन सुनिश्चित करना है।
2. गुणवत्ता में सुधार तथा पूर्णता- इसके अंतर्गत पाठ्यक्रम तथा पाठ्य पुस्तकों का संशोधन करना, शिक्षकों को सुविचारित प्रशिक्षण प्रदान करना, नवाचार एवं संकल्पनाओं से परिचित कराना, अविकसित छात्रों एवं छात्राओं की शिक्षा की व्यवस्था करना एवं सतत मूल्यांकन सम्मिलित है।
3. बेसिक शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करना- इसके अंतर्गत सभी जनपदों में बेसिक शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्राथमिक विद्यालयों की स्थापना करना तथा अनौपचारिक शिक्षा केंद्रों को संचालित करना सुनिश्चित किया गया है।

4. जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम (District Primary Education Programme: DPEP)

डीपीईपी परियोजना की शुरूआत उत्तर प्रदेश की सरकार द्वारा, विश्व बैंक की सहायता से वर्ष 1997- 98 में की गई। पहले चरण में इस परियोजना को केवल उन्हीं जनपदों में लागू किया गया जो साक्षरता स्तर में अत्यंत पिछड़े थे।

इन जनपदों की संख्या 18 है- महाराजगंज, गोंडा, सिद्धार्थनगर, बदायूं, लखीमपुर खीरी, ललितपुर, बस्ती, मुरादाबाद, शाहजहांपुर, सोनभद्र, देवरिया, बरेली, रायबरेली, हमीरपुर, सुल्तानपुर, बहराइच, बाराबंकी तथा रामपुर।

जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम की दूसरे श्रंखला में 22 जनपदों का चयन किया गया जिसके लक्ष्य को 2003 में पूर्ण कर लिया गया। इसके अतिरिक्त डीपीईपी की तीसरी श्रृंखला वर्ष 2000 में प्रदेश के 32 जनपदों में क्रियान्वित की गई इस श्रृंखला को भी 31 मार्च 2006 को पूर्ण कर लिया गया।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत 9 से 11 वर्ष के बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन, धारण एवं गुणवत्ता का लक्ष्य रखा गया।

जिला प्राथमिक शिक्षा परियोजना के अधिकार

1. संविधान में  6 से 14 वर्ष के सभी बच्चों को कक्षा 1 से 8 तक की शिक्षा को अनिवार्य करने का उल्लेख किया गया।
2. पिछड़े हुए क्षेत्रों में शिक्षा के प्रति आकर्षण उत्पन्न करने एवं बालकों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का दायित्व भी ग्राम पंचायत को दिया गया है।
3. शैक्षिक दायित्वों का यह क्रम ग्राम पंचायतों से लेकर न्याय पंचायत, सेवा क्षेत्र, जिला पंचायत तक एक निश्चित रूप रेखा में परिभाषित है।
4. इसके अंतर्गत एससी एसटी छात्र छात्राओं को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखा गया।

5. संपूर्ण साक्षरता अभियान( प्रौढ़ शिक्षा) National Adult Education Programme

5 मई 1988 ईस्वी में राष्ट्रीय साक्षरता मिशन की स्थापना एक सामाजिक तथा प्रौद्योगिकी अभियान के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर की गई। इस योजना का उद्देश्य सन 2007 तक साक्षरता के 75% का न्यूनतम स्तर प्राप्त करना था।

इस मिशन में 1995 तक आठ करोड़ निरक्षर प्रौढ़ों को साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया। अंततः 3 करोड़ निरक्षरों को वर्ष 1990 तथा 5 करोड़ निरक्षरों को वर्ष 1995 तक साक्षर करना सुनिश्चित किया गया।

राष्ट्रीय साक्षरता मिशन की स्थापना के पश्चात 16 जनवरी सन 1989 ईस्वी में संपूर्ण साक्षरता अभियान की घोषणा की गई। केरल राज्य को सर्वप्रथम संपूर्ण साक्षरता अभियान से जोड़ा गया।

केरल में सफलता मिलने के बाद इस कार्यक्रम को पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, महाराष्ट्र तथा गुजरात में भी लागू कर दिया गया। पांडिचेरी तथा गोवा को भी इस परियोजना का हिस्सा बनाया गया।

संपूर्ण साक्षरता अभियान की विशेषताएं-

1. इस कार्यक्रम के तहत सभी प्रशिक्षकों को सघन प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
2. यह परियोजना लक्ष्य पर आधारित है केवल नामांकन वृद्धि पर नहीं।
3. संपूर्ण साक्षरता अभियान को संचालित करने के लिए जिला स्तर पर पंजीकृत समितियों को अनुमति प्रदान की गई है जिससे इस समिति के सभी व्यक्ति एक जुट होकर शिक्षा से संबंधित कार्यों में अपना योगदान दें।
संपूर्ण साक्षरता अभियान कार्यक्रम को संपन्न करने के लिए निम्नलिखित समितियां एवं संगठन उत्तरदाई हैं-
(A) जिला शिक्षा समिति
(B) स्वैच्छिक संगठन
(C) अनुदान आयोग
(D) श्रमिक विद्यापीठ
(E) नेहरू युवा केंद्र संगठन

आशा है आप लोगों को यह पोस्ट”ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड, पी मोस्ट,, BEP, DPEP, प्रौढ़ शिक्षा परियोजनाएं” अवश्य पसंद आई होगी। अगर हमारा यह छोटा सा प्रयास अच्छा लगा हो तो आपसे विनम्र निवेदन है कि इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें जिससे हमें मनोबल प्राप्त होगा और हम आपके लिए ऐसे ही ज्ञानवर्धक पोस्ट लाते रहेंगे। अगर आपके मन में कोई सुझाव या शिकायत है तो आप हमें कमेंट करके बता सकते हैं। अपना बहुमूल्य समय देने के लिए धन्यवाद।

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