व्यक्तित्व का अर्थ ,परिभाषा तथा सिद्धांत

Types of personality in psychology!! नमस्कार दोस्तों exam notes find में आपका स्वागत है आज के इस पोस्ट में हम मनोविज्ञान विषय के अंतर्गत व्यक्तित्व से संबंधित सभी पहलुओं पर चर्चा करेंगे तो आइए शुरू करते हैं-

व्यक्तित्व का अर्थ ( Personality meaning in hindi)

व्यक्तित्व का अर्थ

व्यक्तित्व को अंग्रेजी में Personality कहते हैं, Personality शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के परसोना (Persona) शब्द से हुई है, परसोना (Persona) का अर्थ है मुखौटा (Mask), नकाब।

अतः साधारण शब्दों में Personality शब्द का अर्थ होगा- बाहरी दिखावा। व्यक्तित्व में निम्नलिखित गुण पाए जाते हैं-

1. व्यक्तित्व की प्रकृति संगठनात्मक एवं गत्यात्मक होती है।
2. व्यक्तित्व में मनो-शारीरिक दोनों प्रकार के गुण पाए जाते हैं।
3. व्यक्तित्व वातावरण के साथ समायोजन के रूप में अभिलक्षित होता है।

इससे स्पष्ट होता है कि व्यक्तित्व में शारीरिक गुण जैसे- शारीरिक गठन, रंग रूप ,वेशभूषा ,बातचीत करने का ढंग तथा मनोवैज्ञानिक गुण जैसे- ईमानदारी परोपकारिता, सामाजिकता आदि पाए जाते हैं।

व्यक्तित्व से संबंधित कथन

वुडवर्थ के अनुसार,” व्यक्तित्व व्यक्ति के व्यवहार की समग्र विशेषता है”।

ऑलपोर्ट महोदय के अनुसार,” व्यक्तित्व व्यक्ति के अंदर मनोशारीरिक गुणों का गत्यात्मक संगठन है जो वातावरण के साथ उसका एक अनूठा समायोजन स्थापित करते हैं”।

गिलफोर्ड महोदय के अनुसार,” व्यक्तित्व गुणों का संबंधित रूप है”

व्यक्तित्व के प्रकार (Types Of personality in hindi)

व्यक्तित्व को विभिन्न प्रकार से वर्गीकृत किया गया है जिसका विवरण निम्नलिखित है-

1. शरीर गठन के आधार पर

क्रेशमर के अनुसार व्यक्तित्व का वर्गीकरण

क्रेशमर महोदय ने शरीर गठन के आधार पर व्यक्तित्व को वर्गीकृत किया है। इन्होंने व्यक्तित्व को चार भागों में बांटा-

(A) लंबकाय ( एसथेनिक)
(B) सुडौल काय (एथेलिटिक)
(C) गोल काय ( पिकनिक)
(D) मिश्रित काय (डाप्लास्टिक)

(A) लंबकाय- ऐसे व्यक्तित्व वाले लोग दुबले पतले होते हैं यह दूसरों से घनिष्ठ संबंध बनाने से बचते हैं इनका भार लंबाई की अपेक्षा कम होता है तथा ये अपने क्रोध को सीधे-सीधे अभिव्यक्त नहीं कर पाते हैं।

(B) सुडौलकाय- ऐसे व्यक्ति हष्ट- पुष्ट, स्वस्थ शरीर वाले होते हैं इनका कद न अत्यधिक लंबा होता है और ना ही अत्यधिक छोटा। अर्थात यह स्वस्थ शरीर वाले होते हैं। ये बदली हुई परिस्थितियों में अपने आप को समायोजित कर लेते हैं इसी कारण इन्हें सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।

(C) गोल काय- ऐसे व्यक्ति नाटे ,मोटे होते हैं इनकी गर्दन छोटी तथा मोटी होती है ऐसे व्यक्ति खाने-पीने का भरपूर आनंद लेते हैं ये खुशमिजाज व्यक्ति होते हैं।

(D) मिश्रित काय- मिश्रित काय व्यक्तियों के व्यक्तित्व में उपरोक्त तीनों गुण विद्यमान रहते हैं।

शेल्डन के अनुसार व्यक्तित्व का वर्गीकरण-

(A) लंबाकार
(B) आयताकार
(C) गोलाकार

2. युंग के अनुसार व्यक्तित्व का वर्गीकरण

(A) अंतर्मुखी
(B) बहिर्मुखी
(C) उभय मुखी

(A) अंतर्मुखी- अंतर्मुखी व्यक्तित्व वाले व्यक्ति संकोची एकांत प्रिय, लज्जा प्रिय, जल्दी घबराने वाले, आत्म केंद्रित, आत्म चिंतन तथा असामाजिक प्रवृत्ति के होते है। ये व्यक्ति दूसरों से बोलने तथा मिलने में हिचकिचाते हैं, शीघ्र दुखी हो जाते हैं। इन व्यक्तियों को विभिन्न प्रकार की पुस्तकें पढ़ना अच्छा लगता है।

(B) बहिर्मुखी- बहिर्मुखी प्रवृत्ति के व्यक्ति कुशल, चिंता मुक्त ,आशावादी ,आक्रामक तथा लोकप्रिय प्रकृति के होते हैं। बहिर्मुखी व्यक्ति सामाजिक प्रवृत्ति के होते हैं, समाज के कार्यों में इनका विशेष ध्यान रहता है। यह व्यक्ति मिलनप्रिय होते हैं तथा खेलकूद में रुचि लेते हैं।

(C) उभय मुखी- इस प्रकार के व्यक्तियों में अंतर्मुखी तथा बहिर्मुखी दोनों प्रकार के व्यक्तियों के गुण पाए जाते हैं।

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3. मूल्य की दृष्टिकोण से व्यक्तित्व का वर्गीकरण

स्प्रेंगर महोदय ने मूल्य की दृष्टिकोण से व्यक्तित्व को निम्नलिखित भागों में बांटा है-

(A) सैद्धांतिक
(B) सामाजिक
(C) धार्मिक
(D) आर्थिक
(E) राजनीतिक
(F) कलात्मक

4. शरीर में उपस्थित द्रव्यों के आधार पर व्यक्तित्व का वर्गीकरण

हिपोक्रेट्स महोदय ने शरीर में उपस्थित द्रव्यों के आधार पर व्यक्तित्व को निम्नलिखित भागों में बांटा है-

(A) पीले पित्त वाले- गुस्सैल
(B) काले पित्त वाले- उदास ,मंदित, निराशावादी
(C) रक्त वाले- आशावादी
(D) श्लेष्मा वाले- मंद स्वभाव

5. भारतीय दृष्टिकोण के आधार पर व्यक्तित्व का वर्गीकरण

Shrimad bhagwat Geeta में व्यक्तित्व के तीन गुणों का उल्लेख किया गया है वे गुण हैं- सतोगुण ,तमोगुण ,रजोगुण। इन्हीं गुणों को आधार मानकर भारतीय दृष्टिकोण के आधार पर व्यक्तित्व को तीन भागों में बांटा गया है-
(A) सात्विकी
(B) राजसी
(C) तामसी

(A) सात्विकी- इस प्रकार के व्यक्तियों में सद्गुण की प्रधानता पाई जाती है ऐसे व्यक्ति ज्ञानी, निर्मल तथा शांत स्वभाव के होते हैं।

(B) राजसी- इस प्रकार के व्यक्तियों में सबसे ज्यादा रजोगुण की प्रधानता पाई जाती है ऐसे व्यक्ति साहसी, आक्रामक तथा दबंग प्रकृति के होते हैं।

(C) तामसी- ऐसे व्यक्तियों में तमोगुण की प्रधानता पाई जाती है ऐसे व्यक्ति आलसी, क्रोधी तथा अनावश्यक लड़ाई-झगड़ा करने वाले होते हैं।

व्यक्तित्व के सिद्धांत-

1. शरीर रचना का सिद्धांत

जीव विज्ञान की पृष्ठभूमि वाले वैज्ञानिकों ने मानव व्यवहार तथा व्यक्तित्व के गुणों की एक बिल्कुल अलग प्रकार से व्याख्या की है। इस विचारधारा के प्रमुख प्रवर्तक शेल्डन महोदय हैं। शेल्डन महोदय ने शारीरिक गठन के आधार पर व्यक्तित्व को तीन भागों में विभाजित किया
(A) लंबा कार
(B) आयताकार
(C) गोलाकार
शरीर रचना के आधार पर व्यक्तित्व को परिभाषित करने वाले एक अन्य मनोवैज्ञानिक क्रेशमर थे। उन्होंने व्यक्तित्व को चार भागों में बांटा है-
(A) लंब काय
(B) गोल काय
(C) सुडोल काय
(D) मिश्रित काय

2. मांग का सिद्धांत

मांग के सिद्धांत का प्रतिपादन अब्राहम मैस्लो तथा मुर्रे नामक मनोवैज्ञानिकों ने किया। व्यक्तित्व के मांग सिद्धांत की मान्यता थी की भौतिक तथा सामाजिक वातावरण इसी मांग के कारण उत्पन्न होता है। मांग सिद्धांत में सर्वप्रथम अब्राहम मैस्लो ने अभिप्रेरकों को पांच भागों में विभाजित किया जो निम्नलिखित है-

(A) दैहिक मांग-  दैहिक मांग के अंतर्गत भोजन पानी निद्रा मौन क्रिया से बचने जैसे अवयव आते हैं। दैहिक मांग पूरी हो जाने पर व्यक्ति में सुरक्षा की मांग उत्पन्न होती है।

(B) सुरक्षा मांग- सुरक्षा मांग के अंतर्गत शारीरिक सुरक्षा, बचाव, स्थिरता ,व्यवस्था जैसी मांगे उत्पन्न होती हैं।

(C) सामाजिक मांग- इसके अंतर्गत स्नेह, संबंध, परोपकार आदि जैसी मांगे उत्पन्न होती हैं।

(D) स्व सम्मान मांग- इसके अंतर्गत आत्म सम्मान ,व्यक्तिगत स्वतंत्रता ,स्वाभिमान जैसी मांग उत्पन्न होती है।

(E) आत्म सिद्धि की मांग- उपरोक्त चारों मांगो की पुष्टि संतोषजनक ढंग से हो जाने के बाद आत्मसिद्धि की मांग उत्पन्न होती है। आत्म सिद्धि मांग में सामाजिक मूल्यों का अनुकरण करना पड़ता है। यह मांग सबसे निर्बल स्तर की होती है।

3. शीलगुण का सिद्धांत

ऑलपोर्ट के शीलगुण का सिद्धांत-  शीलगुण के सिद्धांत का प्रतिपादन ऑलपोर्ट तथा कैटल नामक दो मनोवैज्ञानिकों ने किया। व्यक्तित्व के शीलगुण सिद्धांत के अनुसार व्यक्तित्व की रचना भिन्न भिन्न प्रकार के शील गुणों से मिलकर होती है। ऑलपोर्ट ने शील गुणों को दो भागों में विभाजित किया-

(A) सामान्य शीलगुण
(B) व्यक्तिगत शीलगुण

व्यक्तिगत सेल गुणों को ऑलपोर्ट महोदय ने तीन भागों में विभाजित किया है

(A) प्रमुख प्रवृत्ति शीलगुण
(B) केंद्रित प्रवृत्ति शील गुण
(C) गौण शीलगुण

कैटल के शीलगुण का सिद्धांत-

कैटल महोदय ने शील गुणों को चार भागों में बांटा है-
(A) सामान्य शीलगुण
(B) विशिष्ट शील गुण
(C) स्रोत शीलगुण
(D) सतही शीलगुण

शीलगुण मापन के लिए विशेष प्रकार की प्रश्नावली तैयार की गई जिसे 16 व्यक्तित्व कारक प्रश्नावली कहा गया।

4. मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत

मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत का प्रतिपादन फ्रायड महोदय ने किया था मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत के आधार पर फ्रायड महोदय ने दो मुख्य प्रत्यय बताया-
(A) अचेतनता (B) इदम् अहं,पराअहम

(A) अचेतनता- अचेतन मन में असामाजिक, अनैतिक तथा दबी हुई इच्छाएं होती हैं क्योंकि असामाजिक तथा अनैतिक इच्छाओं की पूर्ति दैनिक जीवन में संभव नहीं होती। इसलिए यह इच्छाएं चेतन मन से हटकर अचेतन मन में एकत्रित हो जाती हैं।

(B) इदम्- इदम् जन्मजात प्रवृत्ति का होता है तथा इसमें मुख्य रूप से व्यक्ति की मूल वासनायों तथा दबी हुई इच्छाएं होती हैं। इदम् किसी भी तरह का तनाव नहीं सह सकता। इदम् सुख व संतुष्टि चाहता है।

अहं- अहं का संबंध वास्तविकता से है। यह व्यक्ति को वास्तविक परिस्थितियों के साथ तालमेल बैठाने के लिए प्रेरित करता है।
पराअहम्- पराअहम् का संबंध सामाजिक मान्यताओं, संस्कारों तथा आदर्शों से है। यह व्यक्ति को सामाजिक व राष्ट्रीय हित में त्याग तथा बलिदान के लिए प्रेरित करता है।

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2 COMMENTS

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